दिनांक: 1 अप्रैल 2025
मुख्य विकास अधिकारी श्री मुकेश चंद्र, आईएएस तथा प्रभागीय वन अधिकारी बी. शिव शंकर ने संयुक्त रूप से जनपद बहराइच के तहसील मोतीपुर अंतर्गत वन भूमि पर बसे गांव सुखड़ी पुरवा का भ्रमण किया। गांव में पैदल चलकर उन्होंने लोगों की समस्याएं जानी और चौपाल के माध्यम से उनके वन भूमि पर किए गए दावों के बारे में सघन पूछताछ की।

उपस्थित वन निवासियों ने उनके द्वारा किए गए वानिकी कार्यों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि उनके पूर्वज सैकड़ों वर्ष पूर्व जंगल में टांगिया सिस्टम से वृक्षारोपण करने के लिए पूर्वांचल तथा पश्चिमी बिहार से लाए गए थे। उपस्थित अधिकारियों ने वन अधिकार कानून 2006 के तहत किए गए दावों में प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का परीक्षण किया।

इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी ने वन मजदूरों के द्वारा वानिकी कार्यों में किए गए योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में अधिकार कानून के अस्तित्व में आने के बाद से वन भूमि पर बसे लोगों द्वारा उनके निवास तथा खेती की जमीन पर दावे किए गए हैं और कब्जे की जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए वन अधिकार आंदोलन चलाया जा रहा है।

वन भूमि पर बसे अब तक 19 गांवों में से छह गांव राजस्व ग्राम का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं।

ज्ञातव्य है कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर अब तक 45 गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जा चुका है।

गत दिनों मुख्यमंत्री की वीडियो कांफ्रेंसिंग में बलहा विधानसभा की विधायक सरोज सोनकर ने जनपद बहराइच के अवशेष बचे वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की बात रखी थी, जिसके परिपालन में जिला प्रशासन योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहा है।

जिला मुख्यालय से 122 किलोमीटर दूर बसे सुजौली के गांव सुखड़ी पुरवा में मुख्य राजस्व अधिकारी ने कहा कि वन निवासियों की समस्याओं से शासन को यथास्थिति से अवगत कराया जाएगा।

इस अवसर पर निम्न अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे: